बुरी आदतों से दूर रहने एवं ब्याज मुक्त व्यापार की सलाह देते हैं

- सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन

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दाई अल मुतलक़ सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन साहब दाऊदी बोहरा समाज के रूहानी पेशवा 53 वें धर्म गुरु हैं। 52 वें दाई मुक़ददस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि अ ने 3 रजब हिजरी 1432 , 4 जून सं 2011 में उन्हें 53 वें दाई के पद के लिए अपना उत्तराधिकारी मनोनीत किया था।
सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन का जन्म 23 रमज़ान हिजरी 1365 , 20 अगस्त ,1946 में सूरत शहर में हुआ। ( 23 वीं रमज़ान की रात ( शबे क़द्र ) लैलतुल क़द्र के नाम से जानी जाती हैं। जिसका मतलब इबादत की वह रात जो एक हज़ार रात तक इबादत करने से अफ़ज़ल हैं। इस रात में हज़ार रात तक इबादत करने का सवाब हासिल होता हैं। ) मुक़ददस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि अ ने अपने पुत्र के जन्म की खबर उनके वालिद 51 वें दाई मुक़ददस सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि अ को दी। उन्होंने अल्लाह का शुक्र अदा किया और एक कागज़ पर ‘ आलीक़दर मुफद्दल ‘ लिख शहज़ादे को नाम दिया।
सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन की तालीम ( शिक्षा ) अमीरुल जामिया सूरत मरहूम सैयदी युसूफ नजमुद्दीन साहब द्वारा हुई। और उन्होंने जामिया में सर्वोच्च शिक्षा ग्रहण करने के साथ कुरान मजीद को हिफ़्ज़ ( कंठस्थ ) कर लिया। 23 वर्ष की उम्र में 1 जनवरी 1970 को उनकी शादी जवाहरतुश्शरफ़ बाईसाहेबा बिन्ते सैयदी युसूफ नजमुद्दीन के साथ हुई। हिजरी सं 1970 में मुक़ददस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि अ ने सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन को अमीरुल हज बनाकर उन्हें मक्का भेजा। हज से फ़ारिग़ होकर वे कर्बला एवं नजफ़े अशरफ तशरीफ़ ले गए। सीरिया और मिस्र होते हुए वहां से वे यमन गए।
जहां उन्होंने यमन में बसे समाज के लोगों के हालात का जायज़ा लिया एवं कौम के परचम को बलुंद किया। वहां बसे समाज के लोगों को अपनी वाणी के मधुर अंदाज़ से अपने क़रीब लाये। और यमन में मदफ़ून तीसरे दाई मुक़ददस सैयदना हातिम बिन सैयदना इब्राहिम रिद्वानुल्लाह अलैहे के जदीद मक़बरे की नींव रखीं। इस पुरे सफर से सकुशल मुंबई लौटने की ख़ुशी व्यक्त करते हुए मुक़ददस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि अ ने सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन को ‘ अकीकुल यमन ‘ के ख़िताब से नवाज़ा।
दाऊदी बोहरा समाज के 53 वें धर्म गुरु सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन के जीवन पर नज़र डाले तो हमें 52 वें दाई मुक़ददस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन रि अ की ज़िन्दगी से काफी समानता नज़र आएगी। जिस तरह सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन अपने वालिद 51 वें दाई मुक़ददस सैयदना ताहेर सैफुद्दीन रि अ के साथ हर सफर के दौरान साथ रहें उसी तरह उनके शहज़ादे और उनके मन्सूस उत्तराधिकारी भी उनके हर सफर में उनके साथ -साथ रहें हैं।
सैयदना आलीक़दर मुफद्दल सैफुद्दीन को क़ुरान मजीद को हिफ़्ज़ करने के लिए अपनी कौम के लोगों को ताक़ीद करते है। अपनी तक़रीरों में समाज को बुरी आदतों से दूर रहने एवं ब्याज मुक्त व्यापार करने के लिए फरमाते हैं।